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पत्र एवं पत्रिकाओं मे यौन और यौनिकता विषय पर समाचार

  कुपोषण से हर साल मरते हैं 2 लाख
 
युरोपिअन सांसदो ने कहा, बिहरी बच्चो का जबाब नही
प्रतिनिधि मंडल का नेत्रित्व युरोपियन यूनियन की भारत मे एम्बेस्डर डेनियल सामजा कर रही थी. गांव मे खूब चहल पहल थी. चेहरे पर सबके चमक थी. उम्मीद थी भविष्य की और कुछ करने की भी.
ममता और मानसी द्वरा बिहार मे बाल विवाह एवम जल्द मन बनने के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के पक्ष मे वाटसन ने कहा यह सह्योगा जारी रहेगा.
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Prabhat Khabar, Patna, 13th April 2011
 
बाल विवाह में सबसे आगे मध्यप्रदेश  
मुंबई !   राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष गिरिजा व्यास ने कहा है कि बाल विवाह कानून की सबसे बड़ी खामी यह है कि इसमें अवयस्क जोड़ी को अलग करने की बजाय मान्यता देने जैसी व्यवस्था है। जबकि इसका सख्ती से विरोध होना चाहिए, तभी इस तरह के विवाह पर पूर्णतया रोक लग सकती है। 
सुश्री व्यास यहां बाल विवाह पर आयोजित एक संगोष्ठी में बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में होने वाली शादियों में 73 फीसद शादियां अवयस्क उम्र में कर दी जाती हैं। इस लिहाज से मध्यप्रदेश में बाल विवाह का प्रतिशत अन्य रायों के मुकाबले सबसे अधिक है।  यदि हम बाल विवाह रोकना चाहते हैं तो यहां पर इसका सख्ती से पालन कराए जाने की जरूरत है। साथ ही इसके प्रति जागरूक होना भी जरूरी है। सुश्री व्यास ने कहा, इस तरह की गतिविधियां पर रोक लगाने के लिए समाज को आगे आना होगा। हमारे लिए ये आंकड़े एक चेतावनी हैं। मध्यप्रदेश के बाद आंध्र प्रदेश में यह आंकड़ा 71 फीसदी , राजस्थान में 68 फीसदी, बिहार में 67 फीसदी और उत्तर प्रदेश में 64 फीसदी है।
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'50 पर्सेंट शादी 18 साल से कम उम्र में'
बाल विवाह रोकने वाला कानून सही तरह से लागू न हो पाने की वजह से अभी भी 50 पर्सेंट शादी 18 साल से कम उम्र में हो रही है। एड्रेसिंग जेंडर इनइक्वेलिटी पर आयोजित कंसलटेशन में यह बात सामने आई। इसे विमिन पावर कनेक्ट ने आयोजित किया था। कंसलटेशन के दौरान कानून बेहतर ढंग से लागू करने, लड़कों-लड़कियों के खराब होते अनुपात से संबंधित कानून, घरेलू हिंसा, महिला आरक्षण विधेयक को पास करना सुनिश्चित करने के मौजूदा काम काज पर चर्चा हुई।
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हाशिये पर पड़े बच्चों को शिक्षा कैसे?
पिछले वर्ष एक अप्रैल को जब भारत सरकार ने शिक्षा के अधिकार का कानून लागू किया था, तब करोड़ों लोगों के मन में यह आशा जगी थी कि देश का हर बच्चा अब स्कूल में होगा। स्कूलों की हालात सुधरेगी। मास्टरजी पूरा समय लगाकर बच्चों को पढ़ाएंगे और किसी भी बच्चे या उसके अभिभावक से शिक्षा के अधिकार की कोई कीमत नहीं वसूली जाएगी। यानी 14 वर्ष तक के हर बच्चे को मुफ्त तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। साल भर बाद यदि हम इस दिशा में हुई प्रगति का आकलन करने बैठें, तो कोई बहुत उत्साहजनक रिपोर्ट कार्ड दिखाई नहीं देता। चाहे वह केंद्र सरकार की बात हो या राज्य सरकारों की। पिछले साल भर में सरकार के लंबे -चौड़े दावों से इतर तीन महत्वपूर्ण गैर सरकारी रिपोर्टे जारी हुई हैं। पहली, ‘प्रथम’ की ‘असर-2010 रिपोर्ट’, दूसरी, ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ की ‘शिक्षा पर जन सुनवाई रिपोर्ट-2011’ और तीसरी राष्ट्रीय शिक्षा संकुल की ‘एडवॉच रिपोर्ट-2011’। इन सभी में जो चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं, वे हैं कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति, स्कूलों में जरूरी सहूलियतों, पठन-पाठन तथा खेल सामग्री का अभाव और शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आदि।
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30 जिलों में आधा से ज्यादा ग्रामीण आबादी गरीब
बिहार में बड़ी संख्या में लोग गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) जीवनयापन करने को मजबूर हैं। गरीबी के पैमाने को लेकर राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के बीच खींच-तान चलती रहती है। केन्द्र सरकार बिहार के लगभग 65 लाख परिवारों को ही गरीबी रेखा के नीचे मानती है। और उसी के अनुसार कम कीमत पर अनाज उपलब्ध कराती है। जबकि राज्य सरकार के आकलन के अनुसार यह संख्या करीब 1.45 करोड़ है। राज्य सरकार ने गरीबी रेखा के नीचे के बचे हुए लोगों को अपने बूते 'खाद्य सुरक्षा योजना' के तहत कम कीमत पर अनाज मुहैया कराने का निर्णय किया है। इस दिशा में तेजी से काम चल रहा है। इधर राज्य सरकार के ताजा आंकड़े के अनुसार 57.56 फीसदी ग्रामीण परिवार गरीबी रेखा के नीचे बसर करते हैं। इन परिवारों की संख्या 1 करोड़ 26 लाख 56 हजार 105 है।
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बाल लिंगानुपात पर पीएनडीटी कानून पर उठे सवाल

जनगणना-2011 के अंतिम आकड़ों में छह वर्ष तक की उम्र के बच्चों के लिंगानुपात में आजादी के बाद से सर्वाधिक गिरावट देखे जाने पर प्रसव पूर्व गर्भ निर्धारण के मामलों से निपटने वाले पीएनडीटी कानून को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वर्ष 2001 की जनगणना में छह वर्ष तक की उम्र के च्च्चों में प्रति एक हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 927 थी लेकिन 2011 की जनगणना के अंतिम आकड़े बताते हैं कि एक दशक में इस आयुवर्ग में लिंगानुपात घटकर 914 हो गया है। बाल लिंगानुपात में आजादी के बाद की सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है। ताजा आकड़ों में यह चिंतित कर देने वाला खुलासा हुआ है कि देश के 27 राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में बाल लिंगानुपात में 2001 के आकड़ों की तुलना में खासी कमी दर्ज की गई है। सिर्फ पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, तमिलनाड़ु, मिजोरम और अंडमान निकोबार द्वीप में बाल लिंगानुपात में कुछ सुधार देखा गया है।

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70 फसदी लडकियां स्कूलों में यौन शिक्षा के पक्ष में
मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश मे करवाए गए एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि 70 फीसदी लडकियां स्कूलों में यौन शिक्षा पाठ्यक्रम लागू करने के पक्ष में हैं। मध्यप्रदेश स्वैच्छिक स्वास्थ्य संघ ने अपने इस सर्वे में 12 जिलों की लगभग 250 लडकियों को शामिल किया।ज्यादातर लडकियों का कहना था कि वे अपने माता-पिता से इस संबंध में खुलकर बात नहीं कर सकती। इसी कारण उनको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पडता है। 70 फीसदी लडकियों ने माना कि यौन शिक्षा के माध्यम से वे भविष्य मे किसी भी तरह की यौन संक्रमणकारी बीमारियौं से खुद का बचाव कर सकती हैं।
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