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आपकी रचना ......

एक युवा के रुप में अगर आप के मन में कुछ विचार उभरतें हैं जिसे आप सभी युवाओं के साथ बाटना चाहतें हों तो वेब साईट के इस भाग में अपने विचारों को व्यक्त करें.

आप की सुविधा के लिए हम यहां कुछ युवाओं के विचारों को दे रहें है जिसे पद कर आपको अपने विचार व्यक्त करने में सुविधा होगी.

अगर आप अपनी रचना भेजना चाहते है तो इस पते पर भेजे: mamta@yrshr.org

 

आपकी रचना - 1
मेरा नाम मंगेश है तथा मेरी उम्र 18 साल है.  मैं नागपुर के संजिवन संस्था मे काम करता हूं.  मुझे पांच साल पहले पता चला की मै एच.आई.वी. पॉजिटीव हूं.  जब मेरा टेस्ट किया गया तब मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी. मेरे बदन पर कुछ गाठें आई थी इस लिए मैं गौरमेंट हॉस्पिटल में चेक -अप कराने के लिए गया था. वहां वे मुझे नजर-अंदाज कर रहे थे और बाद मे उन्होने मुझे टेस्ट कराने के लिए कहा.
उन्होने मुझे नहीं बताया की वह कौन सा टेस्ट है पर रिपोर्ट आने के बाद कॉन्सलर ने मुझे बताया की मै एच.आई.वी. पॉजिटीव हूं. मुझे उसी हॉस्पीटल के 96 नम्बर में भेजा गया जहां एच.आई.वी. की मेडिसिन मिलती है. जब मै वहां गया तो कॉसलर ने मुझ से कई सवाल पुछे और तब उन्होने मुझे ठिक से कोई बात नहीं समझाई और एक अलग अंदाज से पेश आए. मै रोने लगा , वहीं पर संजिवन संस्था की माधुरी मैडम बैठी थी.

वह मुझे बाहर लेकर गयी और उन्होने अपने खुद के बारे में बताया की वो स्वयं भी एच.आई.वी. पॉजिटीव हैं और पिछले 6 साल से संजिवन संस्था में काम करती है. उन्होने मुझे यह भी बताया की मुझे अपने एच.आई.वी. पॉजिटीव होने बारे मे अपने घर मे बताने के क्या फायदे और क्या नुकसान हैं.
तब मैने निर्णय लिया कि मै अपने एच.आई.वी. की स्थिती के बारे मे अपने घर मे बताउंगा और मैने उसी दिन अपनी नानी को बताया. उसने मुझे अच्छी तरह से समझाया और दुसरे दिन आठ बजे हीं मैने माधुरी मैडम को फोन करके बताया की मैने अपने घर में बता दिया है. उस समय मैं बहुत खुश था और तब मैने संजिवन ज्वाइन किया और अपने जैसे लोगों से मिलकर और खुश होता हूं. अपने जैसे लोगों को संजिवन के बारे में जानकारी देता हुं. अभी तक मेरा सी.डी. -4 बहुत अच्छा है और अपनी जिदगी बहुत खुशी से बिता रहा हूं.
हम हर महिने सपोर्ट ग्रुप मिटींग लेते हैं जिसके जरीए पी.एल.एच. ए.वी. को नई जानकारी दी जाती है.

मैं पॉजिटीव हूं पर मेरी भी जिम्मेदारी है.